हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में आखिर क्यों नहीं चला योगी-मोदी मैजिक, रवि किशन भी हुए फेल

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दिल्ली, नीतीश गुप्ता। हाल ही हुए दो राज्यों के विधानसभा और दिल्ली एमसीडी चुनाव के नतीजे आ चुके हैं, गुजरात को छोड़कर हर जगह बीजेपी को मुँह की खानी पड़ी है। सबसे पहले दिल्ली एमसीडी चुनाव के नतीजे आये जिसमें आम आदमी पार्टी ने बीजेपी को करारी शिकस्त दी। लगातार 15 सालों से एमसीडी पर काबिज बीजेपी को सत्ता से जनता ने बेदखल कर आम आदमी पार्टी को सिंघासन सौंपा।

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MCD चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 134 सीटें, भाजपा ने 104 सीटें, कांग्रेस ने 9 सीटें और निर्दलीय ने 3 सीटें जीतीं। एमसीडी चुनाव के नतीजे के बाद बीजेपी की बहुत किरकिरी हुई क्योंकि एमसीडी चुनाव में भी बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं ने प्रचार प्रसार किया था।

केवल एमसीडी चुनाव के लिए बीजेपी ने जेपी नड्डा, अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, आदेश गुप्ता, बैजयंत पांडा, अल्का गुर्जर, रामवीर सिंह विधूडी, हर्ष वर्धन, मीनाक्षी लेखी, मनोज तिवारी, गौतम गंभीर, हंसराज हंस, प्रवेश वर्मा, रमेश बिधूडी, गजेंद्र शेखावत, धर्मेंद्र प्रधान, स्मृति ईरानी, सर्बानंद सोनोवाल, राधा मोहन सिंह, जितेंद्र सिंह, गिरिराज सिंह, अनुराग सिंह ठाकुर, योगी आदित्यनाथ, मनोहर लाल खट्टर, पुष्कर सिंह धामी, जयराम ठाकुर, केशव प्रसाद मौर्य, हेमा मालिनी, सुशील मोदी, रवि किशन, संबित पात्रा, श्री सिद्धार्थन, दुष्यंत कुमार गौतम, मंजीत सिंह सिरसा, एल मुरूगन, अन्नामलाई, दिनेश लाल यादव (निरहुआ), विजय गोयल और संजीव बाल्यान आदि को प्रचार प्रसार की कमान सौंपी थी मगर परिणाम आने के बाद किसकी कितनी कहाँ लोकप्रियता है सब सामने आ गया।

वहीं गुजरात में मोदी मैजिक जारी रहा, इस बार के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने प्रचंड जीत हासिल की है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा ने 156, कांग्रेस ने 17, आप ने पांच और अन्य ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की है। बात हिमाचल प्रदेश की करें तो यहां जो हर पांच साल पर सत्ता पलटने वाली परंपरा जारी रही। यहां तमाम कोशिशों के बावजूद बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा।

हालांकि चुनाव से पहले बीजेपी ये जरूर दावा कर रही थी कि वो पांच साल में सत्ता पलटने वाली प्रथा को तोड़ देंगे मगर परिणाम ने इसके उलट तस्वीरें दिखाई। चुनाव से पहले अपने घोषणा पत्र में लाखों रोजगार सहित फ्री सिलेंडर, छात्राओं को फ्री साईकिल, नौकरियों में 33 फीसदी महिला आरक्षण आदि वादे शामिल थे मगर जनता ने ये सब नकार दिया और मौका कांग्रेस को दिया।आपको बता दें कि हिमाचल में बीजेपी ने सबसे ज्यादा ताकत झोंकी थी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने यहां कई जनसभाएं की, गोरखपुर के सांसद रवि किशन ने प्रचार प्रसार किया, जेपी नड्डा, अमित शाह, अनुराग ठाकुर सहित कई दिग्गजों ने पूरी कोशिश की मगर यहां जनता ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया और हर जगह लाचार दिख रही कांग्रेस को यहां मजबूती मिली और चुनाव परिणाम उनके पक्ष में आया।

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस ने राज्य की 68 विधानसभा सीटों में 40 सीटें जीत कर सत्ता वापसी की है। भाजपा को इस चुनाव में 25 सीटें मिली हैं।वहीं इन तीन बड़े चुनाव के साथ यूपी, बिहार में उपचुनाव भी हुए वहां भी बीजेपी की परफॉर्मेंस खराब दिखी। यूपी के मैनपुरी और खतौली में हुए उपचुनाव में बीजेपी को मुँह की खानी पड़ी।

आपको बता दें कि मैनपुरी स्व. मुलायम सिंह यादव की सीट थी, उनके निधन के बाद यहां उपचुनाव हुआ जिसमें सपा से उनकी बहू डिंपल यादव ने चुनाव लड़ा था और बीजेपी को करारी शिकस्त दी। खतौली सीट पर आरएलडी प्रत्याशी ने जीत दर्ज की।

खैर इन नतीजों ने 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव की भी पटकथा लिख दी है कि अगर बीजेपी ने तगड़ी मेहनत नहीं की तो इस बार के परिणाम कुछ और होंगे क्योंकि लगातार बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी ने सत्ताधारियों की नाक में दम कर रखा है वहीं दूसरी ओर विपक्ष भी दो-दो हाथ करने को तैयार है। अब देखना होगा कि हार से बीजेपी क्या सबक लेती है और 2024 के लिए अपनी तैयारी किस तरह करती है?