इस व्यंगकार का जोरदार व्यंग्य- पंडित जी का कट गया पत्ता, “ज्योतिषीय समाधान”

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एक प्रतिष्ठित अख़बार में एक ज्योतिष समाधान का बड़ा चर्चित कालम निकलता था जो ख़ासा लोकप्रिय था, उसके लिए लोग पोस्टकार्ड/पत्र से अपनी कुंडली जन्म समय स्थान प्रश्न आदि लिख के अख़बार के दफ्तर भेजते थे जिसका जवाब अख़बार रत्न और काले कुत्ते या गाय को रोटी खिलाने टाइप समाधान एक पंडित जी से लेकर छापता था, जिन लोगों को जवाब से लाभ होता था वो बाक़ायदा अख़बार को धन्यवाद आदि का पत्र भेजते थे या फोन आदि किया करते थे। यह काम बाक़ायदा एक रिपोर्टर के ज़िम्मे था जो पाठकों के सारे सवाल पंडित जी के पास ले जाता जिनसे अख़बार का प्रति सवाल कुछ रेट तय था फिर तीन चार दिन बाद जाकर वो सबके जबाब लेकर आता था, पर पंडित जी बड़े नख़रेबाज और लापरवाह क़िस्म के व्यक्ति थे।

सवालों का जवाब देने के लिए वो रिपोर्टर को बड़ा झिंकाते थे चार पाँच बार दौड़ने पर ही देते थे, रिपोर्टर त्रस्त था,पर जैसे तैसे चल रहा था,पर एक दिन तो हद ही हो गयी, पंडित जी ने सीधे फ़रमान सुनाया कि वो दो ढाई तीन महीने के लिए कुम्भ में कल्पवास और तमाम तीर्थ यात्रायों के लिए जा रहे हैं सो जवाब नहीं मिल पाएँगे और फिर रिपोर्टर के तमाम आरज़ू मिन्नतों के बावजूद भी पंडित जी हाथ झाड़ के निकल लिए।

उन दिनों मोबाइल आदि का ज़माना भी नहीं था कि समाधान फ़ोन से पूछ लिए जाते इसके अलावा सिर्फ दो तीन महीने के लिए कोई और पंडित तैयार भी नहीं हो रहा था सो रिपोर्टर भयंकर तनाव में आ गया, इस बीच कालम का दिन नज़दीक आते जा रहा था सो एक दिन तनाव की पराकाष्टा में जब उसे कुछ नहीं सूझा तो उसने सारे सवाल उठाए और पहले के छपे तमाम जवाबों की लिस्ट बनाई और उसे सामने रख लिया और सवाल देख के अनडब्बू अपने मन से उनके जवाब लिखने लगा और साथ में कोई रत्न या उपाय भी बताता जा रहा था और इस तरह जवाब बना के उसने कालम लगवा दिया, फिर तो हर बार का यही क्रम हो गया,उसके बाद तो गजब हो गया।

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सबसे आश्चर्यजनक पहलू ये था कि कि एकाएक धन्यवाद वाली चिट्ठियों व फोन की संख्या चार गुनी हो गयीं थी जिनके मुताबिक पंडित जी के उपाय से बहुत फ़ायदा हुआ था।

कहना न होगा कि यात्रा से लौटने के बाद पंडित जी लगातार रिपोर्टर को फोन करते रहे पर उसने नहीं उठाया, पंडित जी पत्ता पत्ता सदा सदा के लिए कट गया हालाँकि कालम बदस्तूर जारी रहा,और उसकी लोकप्रियता दिन दूँनी रात चौगुनी बढ़ती ही गयी, सो आगे किसी ज्योतिषी आदि से मिलने से पहले इस कथा को अवश्य याद कर लें।

नोट- ये व्यंग्य व्यंगकार शैलेश त्रिपाठी द्वारा लिखा गया है जो सच्ची घटना पर आधारित है।

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