नींद खोलो साहब, देखो मकान जर्जर है कभी भी हो सकता है हादसा जा सकती है जान

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गोरखपुर। गोरखपुर के रामगढ़ताल रेलवे कॉलोनी जो जीएम बंगले के कुछ ही दूरी पर स्थित है और गोरखपुर एरिया की जॉन साउथ की कॉलोनी है वो आज अपने अस्तित्व को तरस रही है। इसका कारण है जिम्मेदारों की गहरी नींद और लापरवाही। जर्जर इमारतें, टूटी बज बजाती नालियां नदारद सड़कें इस बात की गवाह है कि दशकों से इस मोहल्ले के लिए अलॉट सरकारी धन का किस प्रकार बंदरबांट किया गया और मोहल्ले का रखरखाव को कागजों तक सीमित रखा गया है।

घटिया निर्माण, घटिया रिपेयरिंग,घटिया रंगा रोगन जो हफ्तों नहीं टिके, आए दिन रहवासियों के साथ होने वाली छोटी बड़ी घटनाएं, शिकायतें एवं समाचार पत्रों के माध्यम से समस्याओं का उजागर ठेकेदार और रेल इंजीनियर के सामंजस्य को बयान करते हैं। प्रतिवर्ष लाखों का बजट इस मोहल्ले के लिए अलॉट होता है, उस बजट में जरूरत के अनुसार वृद्धि भी की जाती है और तो और कर्मचारियों के वेतन से कटने वाले किराया और रखरखाव शुल्क का लेखा जोखा लेने वाला कोई नहीं है।

यह धनराशि किस एवज में अलॉट की जाती है एवं कहां खर्च की जाती है इसका कोई हिसाब नहीं। कॉलोनी वासियों के पास शिकायतों का अंबार है और वह इस भ्रष्ट व्यवस्था से लाचार हैं। रामगढ़ ताल रेलवे कॉलोनी की साफ-सफाई की व्यवस्था के लिए जितने जिम्मेदार रेल अधिकारी हैं उतने ही नगर निगम गोरखपुर के अधिकारी क्योंकि इस मोहल्ले के लोग नगर निकाय चुनाव में मतदाता भी हैं एवं रेलवे से नगर निगम गोरखपुर प्रतिवर्ष नगर में रेलवे द्वारा अधिग्रहण की हुई भूमि का भी एकमुश्त कर वसूल करती है।

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मतलब सीधा सा है रहने का किराया, टैक्स जो एक आम आदमी देता है वही कॉलोनी वाले भी देते हैं मगर फिर भी ये बदहाली में जीने को मजबूर हैं क्योंकि अधिकारी इनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेते। हां पर इतना जरुर कि कागजों में साहब लोगों ने कॉलोनी के लिए इतना पैसा और इतना काम दिखाया है कि आप भी सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि ये कॉलोनी अभी तक चमकी क्यों नहीं?

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