कोरोना की मार से अब तक नहीं उभर पाया है मध्यम वर्गीय परिवार

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नीतीश गुप्ता, गोरखपुर। पिछले साल इसी महीने से देशभर में लॉक डाउन किया गया था कारण कोरोना था। आज लगभग एक साल बाद भी कोरोना से जंग जारी है। पिछले साल कोरोना की वजह से हुए लॉक डाउन ने अच्छे से अच्छे लोगों की कमर तोड़ दी।

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लोगों को अपनी नौकरियां छोड़नी पड़ी, दुकान दौरी सब बन्द हो गए पूरा व्यापार ठप पड़ गया। लॉक डाउन की वजह से कोई सबसे ज्यादा परेशान हुए तो वो है मध्यम वर्गीय परिवार। मध्यम वर्गीय परिवार के लोगों को इस लॉक डाउन में सबसे ज्यादा दिक्कतें झेलनी पड़ी है स्थिति ये है कि आज भी वो उस परेशानी से उभर नहीं पाए हैं।

कोरोना के चलते जब लॉक डाउन हुआ तो सरकार ने लोगों को तमाम सुविधाएं देने की कोशिशें की जिससे की किसी को कोई परेशानी ना हो। गरीबों के लिए सरकार और तमाम समाजसेवियों द्वारा राशन, खाना से लेकर हर मुमकिन इंतजाम किया गया।

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अमीरों को लॉक डाउन से कोई खासा असर नहीं पड़ा। लेकिन मध्यम वर्गीय परिवार के लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ी। इसका कारण ये था कि समाज में एक स्टेटस होने के नाते वो किसी से राशन, पानी मांग नहीं सकते थे अब परिस्थिति ये पैदा हो गई कि उन्हें घर चलाने के लिए कर्ज लेने पड़ गए।

बच्चों की स्कूल की फीस देनी ही थी, घर का बिजली का बिल देना ही था, राशन पानी आदि महीने का खर्च अलग अब घर चले तो चले कैसे इसीलिए कर्ज लेना ही एक रास्ता बचा। अब जबकि चीजें वापस पटरी पर लौट रही है तो मध्यम वर्गीय परिवार के लोगों को उम्मीद है कि वापस से सब ठीक हो जाएगा।

इन सब के दौरान अगर किसी को कोई दिक्कत नहीं हुई तो वो हैं राजनीति करने वाले नेता जी लोग। कोरोना और लॉकडाउन ने भी नेता जी लोगों को परेशान नहीं किया वो पहले भी ठाठ से रह रहे थे और नेतागिरी कर रहे थे और आज भी वो सभी ठाठ से हैं और जमकर राजनीति कर रहे हैं चाहे वो किसी भी पार्टी के हों।

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खैर अब माहौल चुनाव का हो चुका है ऐसा नहीं है कि कोरोना खत्म हो चुका है लेकिन चुनाव तो चुनाव है यहां बस जुनून सत्ता पाने की होती है चाहे उसके किये कीमत कुछ भी चुकानी पड़े।

बाकी हम आपसे अपील करते हैं कि संभल कर रहें, मास्क लगाकर रहे, भीड़भाड़ वाले जगहों पर जाने से बचे।

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