भयावह: लखनऊ में शमशान घाट पर लंबी कतारें, नहीं मिल पा रही जलाने की जगह

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लखनऊ। कोरोना का कहर अब सच में कहर ढा रहा है। प्रदेश की राजधानी में स्थिति खराब होती जा रही है। कोरोना के बढ़ते संक्रमण से मरने वालों की संख्या बढ़ने से विद्युत शवदाह गृहों पर कतार भी लम्बी होती जा रही है। गुरुवार को रात नौ बजे तक 38 शवों का अंतिम संस्कार हुआ।

इसमें 18 बैकुंठ धाम व 20 गुलाला घाट पर दाह संस्कार हुआ। इस दौरान लोगों को लम्बा इंतजार करना पड़ा। लोगों को पांच से छह घंटे तक लाइन में खड़े होकर इंतजार करना पड़ा।

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दोनों विद्युत शवदाह गृहों पर सुबह से ही शवों का पहुंचना शुरू हो गया था। अपराह्न एक बजे तक 12 शव पहुंच चुके थे। इसमें तीन का अंतिम संस्कार हो सका था। यहां लोगों को टोकन दिया जा रहा था।

एक शव के अंतिम संस्कार में एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है। लगभग एक घंटे शव को जलने में व 15-20 मिनट सेनेटाइज करने में खर्च होता है। यहां पर दो मशीनें हैं। लेकिन एक मशीन दो दिन से खराब हो गई थी।

यह लगभग 35 वर्ष पुरानी हो चुकी है। उसे गुरुवार की शाम तक ठीक किया जा सका। रात नौ बजे तक यहां पर 18 शवों का अंतिम संस्कार हुआ। बुधवार-की रातभर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया चलती रही जो गुरुवार को सुबह चार बजे तक चलती रही।

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बैकुंठ धाम के कर्मचारियों ने कहा कि गुरुवार को भी यही स्थिति रहेगी। रातभर अंतिम संस्कार होता रहेगा। उधर गुलाला घाट पर भी लोगों को नम्बर दिया गया था। यहां पर भी देर रात तक 20 शवों का अंतिम संस्कार किया गया।

कर्मचारियों की सुरक्षा दांव पर

दोनों विद्युत शवदाह गृहों पर कर्मचारियों की सुरक्षा दांव पर लगी हुई है। कर्मचारी बिना पीपीई किट के शवों को एम्बुलेंस से उठा रहे हैं और उनका अंतिम संस्कार कर रहे हैं।

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एक शव के अंतिम संस्कार में चार कर्मचारी लगते हैं। इस लिहाज से चार पीपीई किट की जरूरत होती है। लेकिन नगर निगम दोनों स्थानों पर मिलाकर 60-70 पीपीई किट उपलब्ध करा पा रहा है।

जबकि मौजूदा समय में हर दिन लगभग 200 पीपीई किट की जरूरत है। मास्क व ग्लब्स भी नहीं है। कर्मचारियों को धुलकर काम चलाना पड़ रहा है।

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